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GST Compliance

E-Invoicing: कब और किसे बनाना ज़रूरी है?

Updated: Jan 2026 • By Account Hub Team

GST में फर्जी बिलिंग रोकने के लिए सरकार ने E-Invoicing (Electronic Invoicing) सिस्टम लागू किया है। अब आपको अपने कंप्यूटर से बने बिल को सरकारी पोर्टल (IRP) पर अपलोड करके एक QR Code जनरेट करना होता है।

अगर आप पर यह नियम लागू है और आपने बिना QR Code वाला बिल दिया, तो वह बिल Invalid (रद्दी) माना जाएगा और सामने वाले को इनपुट (ITC) नहीं मिलेगा।

Current Limit (2026):
अगर किसी भी पिछले वित्तीय वर्ष (2017-18 से अब तक) में आपका सालाना टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज्यादा रहा है, तो आपको E-Invoice बनाना अनिवार्य है।

1. किन ट्रांजैक्शन पर E-Invoice बनेगा?

E-Invoice सिर्फ B2B (Business to Business) ट्रांजैक्शन के लिए जरूरी है।

Transaction Type E-Invoice Required?
B2B Supply (Registered Party को माल बेचा) ✅ YES (Mandatory)
Export (विदेश में माल भेजा) ✅ YES
B2C Supply (आम ग्राहक को बेचा) ❌ NO (Not Required)
Delivery Challan ❌ NO

2. E-Invoice कैसे बनता है? (Process)

आपको अलग से किसी वेबसाइट पर जाकर टाइप करने की जरूरत नहीं है। आजकल Tally Prime जैसे सॉफ्टवेयर्स में यह फीचर इनबिल्ट होता है:

3. किसे छूट मिली है? (Exemptions)

भले ही टर्नओवर ₹5 करोड़ से ज्यादा हो, इन सेक्टर्स को E-Invoice नहीं बनाना है:


निष्कर्ष (Advice)

अगर आपका टर्नओवर 5 करोड़ पार कर चुका है, तो रिस्क न लें। E-Invoice न बनाने पर बिल की वैल्यू का 100% पेनल्टी (या ₹10,000, जो भी ज्यादा हो) लग सकती है।

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