Updated: Jan 2026 • By Account Hub Team
GST में नए व्यापारियों को सबसे ज्यादा कन्फ्यूजन इसी बात का होता है— "दो अलग-अलग रिटर्न क्यों भरने हैं?"
सरल भाषा में कहें तो, GSTR-1 आपकी दुकान की 'सेल्स बुक' (Sales Book) है और GSTR-3B आपका 'पेमेंट चालान' (Payment Form) है। आइए इसे डिटेल में समझते हैं।
GSTR-1 वह रिटर्न है जहाँ आपको अपनी सभी सेल्स (Outward Supplies) की जानकारी सरकार को देनी होती है।
यह एक सेल्फ-डिक्लेरेशन फॉर्म (Summary Return) है। असली टैक्स का भुगतान इसी फॉर्म के जरिए होता है।
एक नज़र में दोनों का अंतर समझें:
| Basis | GSTR-1 | GSTR-3B |
|---|---|---|
| मकसद (Purpose) | बिक्री (Sales) का विवरण देना। | टैक्स का भुगतान (Payment) करना। |
| डिटेल्स (Format) | बिल-वाइज (Invoice-wise) जानकारी। | सिर्फ टोटल वैल्यू (Summary)। |
| ITC (क्रेडिट) | इससे सामने वाले को ITC मिलता है। | इसमें हम खुद ITC क्लेम करते हैं। |
| Late Fees | 50/- प्रति दिन (अगर लेट हुए तो)। | 50/- प्रति दिन + ब्याज (Interest)। |
दोनों फॉर्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। अब नियम यह है कि आपके GSTR-1 और GSTR-3B का डेटा आपस में मैच होना चाहिए। अगर GSTR-1 में सेल ज्यादा दिखाई और 3B में कम टैक्स भरा, तो आपको GST डिपार्टमेंट से नोटिस आ सकता है।
इसलिए, अकाउंटिंग सही रखें और दोनों रिटर्न समय पर भरें।