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Income Tax

TDS क्या है? आसान रेट चार्ट और नियम

Updated: Jan 2026 • By Account Hub Team

TDS (Tax Deducted at Source) का मतलब है— कमाई के स्रोत पर ही टैक्स काट लेना।

सरकार कहती है कि अगर आप किसी को पेमेंट कर रहे हैं (जैसे सैलरी, कमीशन, रेंट), तो पूरा पैसा देने की बजाय उसमें से टैक्स का हिस्सा काट लें और सरकार को जमा कर दें। बाकी पैसा सामने वाले को दें।

Golden Rule:
TDS सिर्फ उन व्यापारियों को काटना है जिनका पिछले साल ऑडिट (Tax Audit) हुआ था।
अगर आप एक छोटे दुकानदार हैं और आपका ऑडिट नहीं होता, तो आपको रेंट या प्रोफेशनल फीस पर TDS काटने की जरूरत नहीं है (कुछ अपवादों को छोड़कर)।

1. मुख्य TDS रेट्स (Important Rates)

एक अकाउंटेंट को ये सेक्शन्स हमेशा याद रहने चाहिए:

Section Nature of Payment Limit (Salana) Rate
194C Contractor (ठेकेदार) ₹30k (Single) / ₹1L (Total) 1% (Ind), 2% (Other)
194H Commission ₹15,000 से ज्यादा 5%
194I Rent (Land/Building) ₹2,40,000 से ज्यादा 10%
194J Professional Fees (CA, Lawyer) ₹30,000 से ज्यादा 10%
192 Salary Basic Exemption Limit Slab Rate

2. TDS कब जमा करना होता है? (Due Dates)

टैक्स काटने के बाद उसे अपनी जेब में नहीं रखना है, उसे समय पर जमा करना होता है:

3. Property खरीदने पर TDS (Section 194IA)

यह नियम आम आदमी के लिए बहुत जरूरी है। अगर आप कोई मकान या जमीन खरीद रहे हैं जिसकी कीमत ₹50 लाख से ज्यादा है:


निष्कर्ष (Conclusion)

TDS समय पर न काटने या जमा न करने पर भारी ब्याज (1.5% प्रति माह) लगता है। इसलिए ड्यू डेट्स का ध्यान रखें और सही सेक्शन के तहत ही चालान जमा करें।

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